शनिवार, 9 सितंबर 2017

दिव्य नर्मदा हिंदी पत्रिका divyanarmada Hindi patrika : muktak

 नर्मदा हिंदी पत्रिका divyanarmada Hindi patrika : muktak                                    देवेन्द्र पाठक 'महरूम'  की ग़ज़ल-                                                        राम में क्यूं रहमान न देखा. क्यूं रहमान में राम न देखा. बारिश,धूप,हवा.खुश्बू पर; सरहद का व्यवधान न देखा. मन्दिर,मस्जिद बनते जिनसे; अलग-अलग सामान न देखा. दोपाये आदमखोरों का कोई धर्म-ईमान न देखा. कालूराम औ कालूखान में;  क्यूं 'महरूम' इन्सान न देखा.

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