नर्मदा हिंदी पत्रिका divyanarmada Hindi patrika : muktak देवेन्द्र पाठक 'महरूम' की ग़ज़ल- राम में क्यूं रहमान न देखा. क्यूं रहमान में राम न देखा. बारिश,धूप,हवा.खुश्बू पर; सरहद का व्यवधान न देखा. मन्दिर,मस्जिद बनते जिनसे; अलग-अलग सामान न देखा. दोपाये आदमखोरों का कोई धर्म-ईमान न देखा. कालूराम औ कालूखान में; क्यूं 'महरूम' इन्सान न देखा.
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