bijooka
शनिवार, 9 सितंबर 2017
दिव्य नर्मदा हिंदी पत्रिका divyanarmada Hindi patrika : muktak
नर्मदा हिंदी पत्रिका divyanarmada Hindi patrika : muktak देवेन्द्र पाठक 'महरूम' की ग़ज़ल- राम में क्यूं रहमान न देखा. क्यूं रहमान में राम न देखा. बारिश,धूप,हवा.खुश्बू पर; सरहद का व्यवधान न देखा. मन्दिर,मस्जिद बनते जिनसे; अलग-अलग सामान न देखा. दोपाये आदमखोरों का कोई धर्म-ईमान न देखा. कालूराम औ कालूखान में; क्यूं 'महरूम' इन्सान न देखा.
शनिवार, 19 अगस्त 2017
सदस्यता लें
संदेश (Atom)